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क्‍वाड क्‍या है। क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्त्ता।

क्‍वाड हिंद और प्रशांत महासागर से लगे हुए देश भारत, अमेरिका, आस्‍ट्रेलिया और जापान का समूह है। क्‍वाड शब्‍द 'क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता' के क्‍वाड्रीलेटरल (चतुर्भज) से लिया गया है। आधिकारिक तौर पर यह एक औपचारिक गठबंधन नहीं है बल्कि यह एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। लक्ष्‍य।  क्‍वाड का उदेश्‍य भारत-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के हितों की रक्षा करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है। इनमें समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे के अलावा वर्तमान में कोरोना महामारी भी शामिल है। क्‍वाड को चीन के बढ़ते प्रभाव और विस्‍तारवादी महत्‍वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। शुरूआत। 2006 में तत्‍कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे क्‍वाड के गठन पर विचार करने वाले पहले व्‍यक्ति थे। थोड़ा सा पीछे जाएं तो क्‍वाड जैसे समूह को बनाने की जरूरत पहली बार 2004 में आई सुनामी के बाद पड़ा, जब भारत ने जापान, अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर बचाव अभियान चलाया था। पहली बैठक। 4 देशों के इस समूह की पहली बैठक 2007 में फि

यूरोप दौरे पर नरेन्‍द्र मोदी ने विश्‍व नेताओं को दिए शानदार तोहफे।

2 मई को 3 यूरोपीय देशाें के जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी स्‍वदेश लौट आए है। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने विश्‍व नेताओं को उपहार देने के लिए जिन चीजों को चुना, वे भारत की समृद्ध और विविध परंपराओं को दर्शाता है।

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डोकरा नाव।

पीएम मोदी ने डेनमार्क के क्राउन प्रिंस फ्रेड्रिक को छतीसगढ़ की पहचान 'डोकरा नाव' भेंट की। डोकरा गैर-लौह धातु है, जो मोम कास्टिंग तकनीक से बनाई जाती है। इस प्रकार की धातु का उपयोग भारत में 4,000 से अधिक वर्षों से किया जा रहा है।

रोगन पेंटिंग।

डेनमार्क की महारानी मार्ररेट -2 को प्रधानमंत्री ने गुजरात की रोगन पेंटिंग गिफ्ट की। इसमें उबले हुए तेल और वनस्‍पति से तैयार रंगों से बने पेंट को धातु के ब्‍लॉक का उपयोग करते हुए कपड़े पर सजाया जाता है। 20वीं शताब्‍दी के अंत में यह शिल्‍प लगभग समाप्‍त हो गया था, लेकिन वर्तमान में केवल एक परिवार इसे बचाए हुए है।

मीनाकारी पक्षी।

पीएम मोदी ने डेनमार्क की राजकुमारी मैरी का चांदी की बनी 'मीनाकारी पक्षी' की आकृति भेंट की। इस शो पीस को चांदी की तामचीनी की कला से तैयार किया गया है। यह कला वाराणसी में 500 सालों से चली आ रही है, जिसकी जड़ें मीनाकारी की फारसी कला में हैं।

ट्री ऑफ लाइफ।

फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन को पीएम मोदी ने 'ट्री ऑफ लाइफ' उपहार में दिया। यह राजस्‍थान की पहचान मानी जाती है। हाथ से तैयार की गई यह सजावटी कला कृति जीवन के विकास को दिखाती है। पेड़ की जड़ें पृथ्‍वी से संबंध, पत्तियां और पक्षी जीवन जबकी मोमबत्ती स्‍टैंड प्रकाश काे दिखाता है।

कच्‍छ कढ़ाई।

डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन को पीएम ने कच्‍छ एंब्रॉयडरी वाली वॉल हैंगिंग भेंट की। कच्‍छ कढ़ाई गुजरात के आदिवासी समुदाय की एक हस्‍तशिल्‍प और वस्‍त्र हस्‍ताक्षर कला परंपरा है। अपने समृद्ध डिजाइनों के कारण भारतीय कढ़ाई परंपराओं में इसका उल्‍लेखनीय योगदान है।

कश्‍मीरी पश्‍मीना स्‍टोल।

पीएम मोदी ने स्‍वीडन की प्रधानमंत्री मैग्‍डेलेना एंडरसन को जम्‍मू कश्‍मीर की विशेष शैली में सुसज्जित बॉक्‍स में एक पश्‍मीना स्‍टोल भेंट किया। कश्‍मीरी पश्‍मीना स्‍टोल अपनी दुर्लभ सामग्री, उत्तम शिल्‍प कौशल के लिए जाना जाता है।

कोफ्तगिरी कला वाली ढाल।

नॉर्वे के पीएम जोनास गहर स्‍टोर को पीएम मोदी ने राजस्‍थान की कोफ्तगिरी कला वाली ढाल भेंट की। धातु पर तारकशी (कोफ्तगिरी) राजस्‍थान की एक पारंपरिक कला है और इसका उपयोग हथियारों और कवच को सजाने के रूप में किया जाता है।


तारीख: 07/05/2022

लेखक: शत्रुंजय कुमार।

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