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क्‍वाड क्‍या है। क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्त्ता।

क्‍वाड हिंद और प्रशांत महासागर से लगे हुए देश भारत, अमेरिका, आस्‍ट्रेलिया और जापान का समूह है। क्‍वाड शब्‍द 'क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता' के क्‍वाड्रीलेटरल (चतुर्भज) से लिया गया है। आधिकारिक तौर पर यह एक औपचारिक गठबंधन नहीं है बल्कि यह एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। लक्ष्‍य।  क्‍वाड का उदेश्‍य भारत-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के हितों की रक्षा करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है। इनमें समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे के अलावा वर्तमान में कोरोना महामारी भी शामिल है। क्‍वाड को चीन के बढ़ते प्रभाव और विस्‍तारवादी महत्‍वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। शुरूआत। 2006 में तत्‍कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे क्‍वाड के गठन पर विचार करने वाले पहले व्‍यक्ति थे। थोड़ा सा पीछे जाएं तो क्‍वाड जैसे समूह को बनाने की जरूरत पहली बार 2004 में आई सुनामी के बाद पड़ा, जब भारत ने जापान, अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर बचाव अभियान चलाया था। पहली बैठक। 4 देशों के इस समूह की पहली बैठक 2007 में फि

जाने स्वामी शिवानंद के बारे में (पद्मश्री से सम्मानित होने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति)

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Swami Shivanand

स्वामी शिवानंद के जीवन के बारे में। 

स्वामी शिवानंद वाराणसी के एक सन्यासी हैं, जिनका जन्म अविभाजित भारत के सिलहट जिले अब बांग्लादेश में पड़ता है में 8 अगस्त 1896 को हुआ था। 6 साल की उम्र में अपने माता पिता को खोने वाले स्वामी शिवानंद का बचपन गरीबी में गुजरा है। बचपन में मुख्य रूप से उन्हें उबले हुए चावल का पानी मिलता था। 

स्वामी शिवानंद की शिक्षा। 

माता पिता के निधन के बाद, स्वामी शिवानंद को पश्चिम बंगाल के नवदीप में गुरु ओंकारानंद गोस्वामी के आश्रम में ले जाया गया। वहां गुरु ओंकारानंद गोस्वामी ने ही उनका पालन पोषण किया और उन्हें बिना स्कूली शिक्षा के योग सहित सभी व्यवहारिक और आध्यात्मिक शिक्षा दी। 

स्वामी शिवानंद का रहन सहन। 

स्वामी शिवानंद अपनी लंबी आयु का श्रेय योग, बिना तेल और बिना मसाले के खाने को देते हैं। उनका मानना है कि योग स्वस्थ जीवन जीने का मार्ग है, यह इंद्रियों, मन और इच्छा को नियंत्रित करता है। शिवानंद सुबह 3:00 बजे उठते हैं और एक कठोर दिनचर्या का पालन करते हैं। वे कहते हैं -

"मैं बहुत ही सादा और अनुशासित जीवन जीता हूं। बहुत साधारण खाना खाता हूं। केवल उबला हुआ आहार, जिसमें ना तेल होता है, ना मसाले बस कुछ हरी मिर्च के साथ उबली हुई दाल के साथ चावल लेता हूं। "

मानव सेवा में इनका योगदान। 

पिछले 50 वर्षों से स्वामी शिवानंद पुरी में कुष्ठ रोग से प्रभावित कई भिखारियों की सेवा कर रहे हैं। वह उन्हें खाद पदार्थ, फल, कपड़े, कंबल, मच्छरदानी, खाना पकाने के बर्तन आदि उपलब्ध कराते हैं। सरकार ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में लिखी है, "वह (शिवानंद) उन्हें जीवित भगवान के रूप में मानते हैं और सर्वोत्तम उपलब्ध वस्तुओं के साथ उनकी सेवा करते हैं।"

स्वामी शिवानंद के विचार। 

"संसार मेरा घर है यहां रहने वाले लोग मेरे माता-पिता हैं उन से प्रेम करना और उनकी सेवा करना ही मेरा धर्म है"

"पहले लोग कम चीजों में खुश थे। आजकल लोग दुखी हैं, अस्वस्थ हैं और बेईमान हो गए हैं, जिससे मुझे बहुत पीड़ा होती है, मैं बस यही चाहता हूं कि लोग खुश, स्वस्थ और शांति से रहे"

"गुरु जी की कृपा से मुझे कोई इच्छा नहीं है। कोई बीमारी नहीं है, कोई डिप्रेशन नहीं है, कोई टेंशन नहीं है और ना ही हाइपरटेंशन है"

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