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क्‍वाड क्‍या है। क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्त्ता।

क्‍वाड हिंद और प्रशांत महासागर से लगे हुए देश भारत, अमेरिका, आस्‍ट्रेलिया और जापान का समूह है। क्‍वाड शब्‍द 'क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता' के क्‍वाड्रीलेटरल (चतुर्भज) से लिया गया है। आधिकारिक तौर पर यह एक औपचारिक गठबंधन नहीं है बल्कि यह एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। लक्ष्‍य।  क्‍वाड का उदेश्‍य भारत-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के हितों की रक्षा करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है। इनमें समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे के अलावा वर्तमान में कोरोना महामारी भी शामिल है। क्‍वाड को चीन के बढ़ते प्रभाव और विस्‍तारवादी महत्‍वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। शुरूआत। 2006 में तत्‍कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे क्‍वाड के गठन पर विचार करने वाले पहले व्‍यक्ति थे। थोड़ा सा पीछे जाएं तो क्‍वाड जैसे समूह को बनाने की जरूरत पहली बार 2004 में आई सुनामी के बाद पड़ा, जब भारत ने जापान, अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर बचाव अभियान चलाया था। पहली बैठक। 4 देशों के इस समूह की पहली बैठक 2007 में फि

अंतरिक्ष में कदम रखने वाले पहले इंसान यूरी गागरिन पर विशेष

यूरी गागरिन का जन्म 9 मार्च 1934 को मॉस्को के स्मोलेंस्क क्षेत्र के कलुशीनो गांव में हुआ था। उनके पिता एक बढ़ई थे जबकि मां दूध का कार्य करती थी। उनका परिवार भी बहुत लोगों की तरह, द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों द्वारा पीड़ित हुआ था। 

Yuri Gagarin

रूसी वायु सेना में लेफ्टिनेंट। 

यूरी गागरिन शुरू में फाऊंडरीमैन के रूप में ट्रेड स्कूल से स्नातक किया। बाद में उन्होंने सारातोव टेक्निकल कॉलेज में तकनीकी डिग्री के लिए दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान, गागरिन ने एक लोकल फ्लाइंग क्लब के साथ विमान उड़ाना सीखा। 1955 में, यूरी गागरिन ने ओरेनबर्ग पायलट स्कूल में प्रवेश लिया और सोवियत रूस सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में भर्ती हो गए। 

अंतरिक्ष मिशन के लिए चयन। 

1960 में, 3000 आवेदकों में से यूरी गागरिन का 19 अन्य लोगों के साथ सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चयन हुआ। शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परीक्षण के दौरान गागरिन ने बेहतर प्रदर्शन किया और वह अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति के रूप में चुने गए। उनके चयन के कारकों में से एक उनकी शारीरिक विशेषताएं भी थी, दरअसल, वोस्तोक अंतरिक्ष यान के कॉकपिट का स्पेस छोटा था और गागरिन की लंबाई सिर्फ 5 फुट 2 इंच थी। 

12 अप्रैल, 1961 को यूरी गागरिन अंतरिक्ष यान वह तो 'वोस्तोक-1' में सवार हुए। उस समय कोई नहीं जानता था कि मिशन सफल होगा या असफल। जैसे ही सुबह 9:07 बजे पर रॉकेट छोड़ा गया तो गागरिन ने कहा 'पोयेखाली', जिसका अर्थ होता है- "अब हम चलें"

अंतरिक्ष से पृथ्वी पर वापसी। 

धरती पर वापस आते हुए कुछ तकनीकी खामियों के चलते गागरिन के कैप्सूल का तापमान बढ़ गया और वह अपने होश होने लगे थे कैप्सूल के जमीन पर टकराने से पहले ही गागरिन ने पैराशूट से छलांग लगाकर एक नदी के पास सुरक्षित लैंडिंग की। 

27 वर्षीय यूरी गागरिन अंतरिक्ष में कदम रखने वाले पहले शख्स बन चुके थे। ऐतिहासिक मिशन को सफल कर यूरी जब धरती पर लौटे तो दुनिया ने उनका स्वागत एक हीरो की तरह किया। गागरिन का सफल मिशन तत्कालीन सोवियत संघ के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, क्योंकि रूस अंतरिक्ष में पहला मानव भेजने की प्रतियोगिता में अमेरिका को मात दे दी थी। 

1968 में गागरिन ने दुनिया को कहा अलविदा। 

अंतरिक्ष में अपनी पहली सफल उड़ान के बाद, गागरिन को फिर कभी अंतरिक्ष में नहीं भेजा गया। 27 मार्च 1968 को, नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान उनका मिग-15 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें यूरी गागरिन की मृत्यु हो गई। उस समय वह 34 वर्ष के थे। 


तारीख: 27/03/2022 

लेखक: शत्रुंजय कुमार। 

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