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क्‍वाड क्‍या है। क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्त्ता।

क्‍वाड हिंद और प्रशांत महासागर से लगे हुए देश भारत, अमेरिका, आस्‍ट्रेलिया और जापान का समूह है। क्‍वाड शब्‍द 'क्‍वाड्रीलेटरल सुरक्षा वार्ता' के क्‍वाड्रीलेटरल (चतुर्भज) से लिया गया है। आधिकारिक तौर पर यह एक औपचारिक गठबंधन नहीं है बल्कि यह एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। लक्ष्‍य।  क्‍वाड का उदेश्‍य भारत-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के हितों की रक्षा करना और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करना है। इनमें समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे के अलावा वर्तमान में कोरोना महामारी भी शामिल है। क्‍वाड को चीन के बढ़ते प्रभाव और विस्‍तारवादी महत्‍वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। शुरूआत। 2006 में तत्‍कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे क्‍वाड के गठन पर विचार करने वाले पहले व्‍यक्ति थे। थोड़ा सा पीछे जाएं तो क्‍वाड जैसे समूह को बनाने की जरूरत पहली बार 2004 में आई सुनामी के बाद पड़ा, जब भारत ने जापान, अमेरिका और आस्‍ट्रेलिया के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्‍तर पर बचाव अभियान चलाया था। पहली बैठक। 4 देशों के इस समूह की पहली बैठक 2007 में फि
हाल की पोस्ट

TIME मैग्‍जीन की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों कि सूची में भारतीयों का स्‍थान।

TIME मैग्‍जीन ने दुनियां के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की 2022 की सूची जारी की है। मैग्‍जीन ने सूची को 6 श्रेणियों आर्टिस्‍ट, इनोवेटर्स, टाइटंस, लीडर्स, आइकंस और पायनियर्स में बांटा है। इसमें रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादीमीर पुतीन, यूक्रेन के राष्‍ट्रपति व्‍लादीमीर जेलेंसकी और एप्‍पल के सीइओ टिम कुक जैसी हस्तियों ने भी जगह पाई है। इस सूची में किन भारतीयों काे जगह मिली है। इसका विवरण विस्‍तार से निम्‍नलिखित है। गौतम अदानी। अप्रैल में दुनियां के 5वें सबसे अमीर व्‍यकित बने और भारत के सबसे अमीर शख्‍स गौतम अदानी को टाइटंस कैटेगरी में जगह मिली है। टाइम मैग्‍जीन:- "एक समय में क्षेत्रीय रहा अदानी का कारोबार अब हवाईअड्ो, निजी बंदरगाहों से लेकर अपभोक्‍ता वस्‍तुओं तक पहुंच गया है। अदानी समूह दुनियां की छठी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था की राष्‍ट्रीय स्‍तर की बड़ी कंपनी है। लाेगों की नजरों से दूर रहते हुए अदानी खामोसी से अपने कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं।" करूना नंदी। सुप्रीम कोर्ट की वकील करूणा नंदी ने लीडर्स श्रेणी में अपनी जगह बनाई है।  टाइम मैग्‍जीन:- वह न केवल एक एडवोकेट है, बल्कि एक सक्रियता

भारत की 10 लाख आशा कार्यकर्ताओं को WHO ने किया सम्‍मानित।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भारत की 10 लाख से अधिक आशा स्‍वंयसेवकों को 'ग्‍लोबल हेल्‍थ लीडर्स' अवार्ड से सम्‍मानित किया है। इन स्‍वयंसेवकों को यह सम्‍मान ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वस्‍थ्‍य सुविधाएं पहुंचाने और देश में कोविड 19 वायरस महामारी के खिलाफ अभियान में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए दिया गया है। कौन होती है आशा? मान्‍यता प्राप्‍त सामाजिक स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता या आशा स्‍वयंसेवक भारत सरकार से जुड़े स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करते हैं। देश भर में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तकरीबन 10.61 लाख आशा हैं, जो समुदाय और जनस्‍वास्‍थ्‍य प्रणाली के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। आशा कार्यक्रम को पहली बार 2006 में लॉन्‍च किया गया था। WHO ने क्‍या कहा? इस मौके पर WHO ने कहा कि इन आशा कार्यकर्ताओं को समुदाय को स्‍वस्‍थ्‍य प्रणाली से जोड़ने और ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगाें तक प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा पहुंचाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका के लिए सम्‍मानित किया जाता है। WHO के अनुसार ऐसे समय में जब दुनियां असमानता, संघर्ष, खाद्य असुरक्षा, जलवायु संकट और म

मामे खान: राजस्‍थान के गांव से कान्‍स फिल्‍म महोत्‍सव तक का सफर।

फ्रांस में चल रहे 75वें कान्‍स फिल्‍म समारोह में राजस्‍थान के लोक कलाकार मामे खान ने भारतीय दल की तरु से रेड कार्पेट का नेतृत्‍व कर पहले लोक कलाकार बनकर इतिहास रच दिया है। इस अवसर पर खान पारंपरिक राजस्‍थानी ड्रेस में दिखे। उन्‍होेंने मैजेंटा कुर्ते के साथ मैचिंग पायजामा पहना हुआ था, जिस पर भारी कढ़ाई वाली जैकेट डाली गई थी। जैसलमेर का सत्तो गांव। राजस्‍थान में जैसलमेर के सत्तो गांव के रहने वाले मामे खान मंगनियार घराने की 15वीं पीढ़ी है। कई सालों तक मामे ने विभिन्‍न स्‍थानीय त्‍योहारों और शादियों में अपने समुदाय के लोगों के साथ लाेकगीत गाकर अपना जीवन गुजारा है। मामे का कहना है कि संगीत की प्रेरणा उन्‍हें अपने पिता राणा खान से मिली है, जो उनके घराने के एक बड़े गायक थे। कैसे आए गायकी की ओर। शुरूआत में मामे खान का मन लय में लगता था और वह ढोलक बजाना पसंद करते थे। एक बार 7 महीने के टूर पर बेल्जियम गए मामे खान लौटते समय अपनी कीमती ढोलक भूल आए थे। खान को लगा कि उन्‍हें ढोलक वापस लाने के लिए वापस बेल्जियम जाना होगा। लेकिन उनके पिता राणा खान ने उन्‍हें गायकी में हाथ आजमाने को कहा और उसके बाद मामे

नवाजुद्दीन सिद्धकी के जन्‍मदिन पर विशेष।

नवाजुद्दीन सिद्धकी को फिल्‍मों में लीड रोल लेने के लिए एक लंबा इंतजार करना पड़ा है। आज एक अलग पहचान बना चुके, नवाजुद्दीन सिद्धकी का एक समय ऐसा भी था जब उन्‍हें छोटे मोटे रोल पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।  यह जानकर हैरानी हो सकती है कि अमिर खान के साथ नवाजुद्दीन सिद्धकी की पहली फिल्‍म तलाश नहीं थी, इससे पहले दोनों सरफरोस में काम कर चुके थे। नवाजुद्दीन सिद्धकी की कुछ ऐसी ही फिल्‍मों पर एक नजर डालते हैं, जिनमें उन्‍हें नोटिस नहीं किया गया। 1999 में सरफरोश। नवाजुद्दीन सिद्धकी परदे पर पहली बार आमिर खान की सरफरोश में दिखे थे। इसमें उन्‍होंने एक लोकल अपराधी की भूमिका निभाई, जिसे फिल्‍म में विक्‍टोरिया हाउस में छापे के बाद गिरफ्तार किया जाता है और पूछताक्ष होती है। 1999 में शूल। उनकी अगली फिल्‍म शूल थी, जिसमें मनोज वाजपेई मुख्‍य भूमिका में थे। फिल्‍म में नवाजुद्दीन सिद्धकी एक वेटर के रूप नजर आए थे। 2003 मुन्‍नाभाई एमबीबीएस। नवाजुद्दीन सिद्धकी ने राजकुमार हिरानी की इस फिल्‍म में एक जेबकतरे का किरदार निभाया था, जो सुनिल दत (फिल्‍म में संजय दत के पिता) का पर्स चुरा लेता है। 2004 ब्‍लैक फ्र

भारत ने दुनियां को गेहूं निर्यात रोकने का फैसला क्‍यों लिया।

भारत के तत्‍काल प्रभाव से गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है। विदेश व्‍यापार महानिदेशालय ने कहा है कि गेहूं के वैश्विक मूल्‍यों में आए अचानक उछाल के परिणामस्‍वरूप भारत, पड़ोसी तथा अन्‍य प्रभावित देशों के सामने खाद्य सुरक्षा का जोखिम उत्‍पन्‍न हो गया है और देश की खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन करने और पड़ोसी देशों व अन्‍य प्रभावित देशों की सहायता के लिए सरकार गेहूं की निर्यात नीति संशोधन करती है। इससे पहले क्‍या थी भारत की पालिसी। भारत ने पहले कहा था कि वह यूक्रेन पर हुए आक्रमण के कारण गेहूं आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने में मदद करेगा। गेहूं के वैश्विक निर्यात में यूक्रेन 12 प्रतिशत का भागीदार है। भारत ने इस वित्तिय वर्ष में गेहूं के निर्यात को 70 लाख टन से बढ़ाकर 1 करोड़ टन करने की योजना बनाई थी। निर्यात रोकने के कारण। सरकार ने बढ़ती महंगाई काबू में करने और 1.4 अरब लोगों को खाद्य सुरक्षा देना मुख्‍य कारण बताए हैं। वाणिज्‍य सचिव बीवीआर सुब्रमण्‍यम ने कहा कि हालिया हफ्तों में देश के कुछ हिस्‍सों में गेहूं और आटे की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कुछ मिडिया रिर्पोटर्स के अनुसार

देश के कई हिस्‍से लू की चपेट में।

देश के अलग अलग हिस्‍सों में मार्च से शुरू हुआ गर्मी का प्रकोप मई में भी जारी है। रविवार यानी 15 मई को दिल्‍ली में पहली बार अधिकतम तापमान 49.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, उतर प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार भारत में इस साल मार्च 122 वर्षों में सर्वाधिक गर्म और अप्रैल, चौथी बार सबसे अधिक गर्म रहा।   कब होती है लू की घोषणा। जब अधिकतम तापमान सामान्‍य से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक हो जाता है, तो तब भीषण लू की घोषणा की जाती है। जम्‍मू-कश्‍मीर, पंजाब, राजस्‍थान, हरियाणा, दिल्‍ली, चंउीगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, गुजरात, महाराष्‍ट्र और तेलंगाना ऐसे राज्‍य हैं, जहां लू चलती हुई देखी जा रही है। कश्‍मीर में भी 30 डिग्री तापमान। हाल ही में कश्‍मीर में कई स्‍थानों पर दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जो आमतौर पर राज्‍य की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी कश्‍मीर के लिए गर्म है। जम्‍मू-कश्‍मीर में रविवार को सबसे गर्म स्‍थान मीरपुर 46 डिग्री सेल्सियस, जम्‍मू एयरपोर्ट 45 डिग्री सेल्सियस तथा श्रीनगर एयरपोर्ट 33 डिग्री सेल्सिय