इस गांव की जमीनी हकीकत से नीतीश सरकार की खुल जाएगी विकास के दावों की पोल…

nitish kumar

फाईल फोटो

ललन कुमार, शेखपुरा: शेखपुरा में एक ऐसा छोटा सा गांव है जहां चापाकल भरमार है, लेकिन उसकी वस्तु स्थिति कुछ और ही है. बिहार सरकार की सरकारी योजनाओं का हाल जानने के लिए हमारे डेली बिहार न्यूज के सीनियर संवाददाता जिला मुख्यालय से महज ढाई किमी उतर की ओर अरियरी प्रखण्ड स्थित पंधर गांव सुबह-सुबह पहुंचे. उनके बाइक पर लिखे प्रेस देख पंधर गांव के कुछ लोग उनके इर्द गिर्द आ पहुंचे. कुछ बुजुर्ग भी वहां पहुंचे.

पंधर गांव के ग्रामीणों ने उनसे अपने गांव की पेयजल की समस्या को बताना शुरू कर दिया. ग्रामीणों में 70 वर्षीय यमुना महतो ने कहा कि उनके गांव में पीने की पानी की बड़ी समस्या है. ऐसे तो यहां कहने को 26 चापाकल है लेकिन उसमें मात्र 2 चापाकल ही चालू हालत में है. जो चापाकल चालू हालत में है वह पानी भी कम उगलता है.

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एक बाल्टी पानी भरने में उस चापाकल पर दम फूलने लगता है. उसी गांव का युवक मो शहजाद ने कहा कि इस गांव में कुल 26 चापाकल है. सांसद फंड से दो, पीएचईडी से तीन और शेष मुखिया फंड से चापाकल गाड़ा गया है. शहजाद ने कहा कि मुखिया और सांसद फंड वाला गाड़ा गया चापाकल वर्षों से खराब पड़ा है. लेकिन पीएचईडी के तीन चापाकल में दो चापाकल किसी तरह पानी दे पाता है. उन चापाकलों की मरम्मती भी ग्रामीणों से चंदा चिट्टाकर कर लेते हैं.

मांझी टोला के राजेन्द्र मांझी, धनमा देवी, रुणा देवी समेत अन्य लोंगों ने कहा कि आज से दस वर्ष पहले एक चापाकल उनके मोहल्ले में गाड़ा गया था. एक दो महीना वह चापाकल पानी दिया और बाद में खराब हो गया।तब से वैसे ही यह खराब पड़ा है. पीने का पानी लाने के लिए गांव से पश्चिम बगीचे में स्थित कुंआ पर जाना पड़ता है. 80 वर्षीय धनमा देवी ने कहा कि पानी की बहुत बड़ी समस्या है. इस गांव पर सरकारी पदाधिकारी का कोई ध्यान ही नहीं है. इस गांव के स्कूली बच्चे भी पीने के पानी की समस्या से जूझते देखे जा रहे हैं.

प्राथमिक विद्यालय पंधर के दूसरी कक्षा में पढ़ने वाला अंकित कुमार और तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला ब्रजेश कुमार ने कहा कि उसके स्कूल के आगे भी सरकारी चापाकल खराब पड़ा है. स्कूल में प्यास लगने पर वे लोग अपना अपना घर जाकर पानी पीते है. इस दौरान उनका पढाई भी बाधित होता है. बच्चों ने कहा कि आखिर क्या करें. वहीं सैफ उद्दीन और मो अबू हुसैन ने कहा कि पंधर में चापाकल की कमी नहीं है लेकिन पानी की कमी है.

वे लोग पानी की समस्या को लेकर कई बार मुख्यमंत्री को,प्रधान मंत्री को पीएचईडी मंत्री को यहांतक कि डीएम को भी आवेदन रजिस्ट्री से दे चुके है. लेकिन फिर भी आज तक कोई कार्रवाई पानी समस्या को लेकर जिला प्रशासन द्वारा नहीं की गई। इस संबंध में पीएचईडी के कार्यपालक अभियन्ता से संपर्क किये जाने पर उनसे सम्पर्क नहीं हो पाने के चलते उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई. यह जमीनी हकीकत मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के हर घर नल जल योजना को मुंह चिढा रहा है.

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