इस बिहारी युवा अभिनेता के अभिनय को देख तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके सीएम नीतीश कुमार….


विकर्ण राज वर्मा: एक छोटे से शहर का लड़का जिसके पास कुछ सपने, एक चाहत, चेहरे पर हंसी और कुछ कर गुजरने की ललक अल्हड़पन तो दुसरी तरफ गंभीरता कूट-कूट कर भरा पड़ा. बचपन में नदी में जाकर डुबकी लगाना फिर रेत पर कलाकृतियाँ बनाने का शौक. कौन जानता था एक दिन इन्हीं कलाकृतियों में खुद को ढाल देगा.

पिता से विरासत में मिली कला क्षेत्र में दो कदम आगे बढ़ते हुए आज सिनेमा जगत में अपना परचम लहरा रहा है यह युवा बिहारी अभिनेता विक्रांत चौहान. मुख्यमंत्री के गृहजिला नालंदा स्थित इस्लामपुर के रहने वाले युवा अभिनेता को कला पिता उपेन्द्र सिंह से विरासत में मिली. बचपन की लत धीरे-धीरे आगे बढती गई. तमन्ना थी पटना आर्ट कॉलेज में दाखिला लेकर आगे पढाई करने की अफसोस सारे सपने धरे के धरे रह गए, अरमानों पर पानी फिर गया. लेकिन कहते हैं न कि जो भी होता है अच्छा ही होता है. आखिरकार निराशा दूर भागती है और खुशियां दामन की तरफ एक कदम बढ़ाती है. अपने बड़े भाई विशाल सिंह के सुझाव पर 2008 में एनिमेशन का कोर्स कर, एनिमेशन की उच्च शिक्षा के लिए पुणे के रिलायंस बिग एम्स गये जहाँ थ्रीडी मॉडलिंग और पोस्ट प्रोडक्शन का काम भी सीखा. मुंबई की तरफ रुख करने से पहले ही परस्थितियों ने फिर से पटना लौटने पर विवश कर दिया.



शायद मन के अन्दर कुछ और ही चल रहा होता रेत पर कलाकृतियां और तस्वीर बनाने का झुकाव इन्हें अभिनय की तरफ खींच कर ले गया. अंततः इस कला प्रेमी ने चित्रकला से रंगमंच के दुनिया की तरफ रुख किया. थियेटर को जीवंत कर देने की अद्भुत कला किताबों और गुणी लोगों के सानिध्य में रहकर सीखी. विक्रांत ने विस्तार संस्था से जुड़ने के बाद हिरावल, राग, माध्यम फाउंडेशन, प्रवीण सांस्कृतिक मंच, डिवाइन सहित कई अन्य के साथ मिलकर कई नाटक किए. रंगमच के बेहतरीन कलाकार विनीत कुमार को अपना गुरु मानने वाले विक्रांत ने अबतक बतौर रंगकर्मी 25 नाटक और तकरीबन 20 शॉर्ट फिल्म, टेलीफिल्म, डॉक्यूमेंट्री में काम करने के अलावा सीरियल में भी काम किया है. विक्रांत की आने वाली दो फिल्में है, जंगल और बॉक्सर. जिनमें वो अहम् किरदार में हैं.

फिल्मों की यात्रा कुछ यूं शुरू हुई.

विक्रांत के एक दोस्त अमित जी इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव ऑर्ट से थे. दोनों ने मिलकर कुछ अन्य मित्रों के साथ 17 मिनट की फिल्म एंडलेस बनाई. इसके बाद अभिजीत के निर्देशन में मेमोरेबल मॉमेंट नाम से एक और फिल्म बनाई. इसके बाद शिव कुमार के निर्देशन में बनी फिल्म गोपी के लिए विक्रांत को अवॉर्ड भी मिला.



जहाँ सिनेमा गीत-संगीत और संवाद के जरिये आजकल चल रही है ऐसे में विक्रांत ने एक ऐसी शॉर्ट फिल्म में काम किया जिसकी तारीफ हर कोई करता है. रुचीन चैनपुरी के निर्देशन और एजाज हुसैन के संपादन में बनी शॉर्ट फिल्म फिल्म नाइन ने लोगों के दिल में एक अलग प्रभाव छोड़ा है. सिनेमा के आलोचकों ने इस फिल्म की तारीफ़ की है. खासकर इस जमाने में डॉयलोग लेस फिल्म का निर्माण करना और उसमे बेहद ही संजीदा किरदार का अभिनय निभाना किसी कठिन कार्य से कम नहीं है. पञ्च तत्वों के आधार पर बनी यह फिल्म विक्रांत के लिए काफी मायने रखती है. जब इस फिल्म का निर्माण कार्य चल रहा था उस समय नोटबंदी के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.



विक्रांत कहते हैं, “उस दिन को मैं कैसे भूल सकता हूं जब इस फिल्म का फिल्मांकन करना था. अगली सुबह मै अपने शूटिंग पे जाने वाला था अचानक मेरी मां के देहांत की ख़बर मुझे मिली, मैं फूट-फूट कर रोया, पर चाह के भी घर नही जा पाया. क्योंकि निर्माता के पैसे, सेटअप का खर्च और पूरी यूनिट की काफी मेहनत लगी हुई थी” विक्रांत कहते हैं थिएटर ने मुझे सिखलाया है “शो मस्ट गो ऑन”



हालांकि अपने पिता के बारे में कहते हैं, “इस विपदा की घड़ी में पापा ने मुझे हौसला दिया अंतिम दृश्य को करते-करते मै रो रहा था लेकिन मै अपने प्रोफेशन और पिताजी का सपना साकार करना चाहता था लोगों ने इस फिल्म की काफी तारीफ़ की मुझे ये जीवन भर याद रहेगी इससे मेरी मां की यादें हमेशा के लिए बनी रहेगी.”



विक्रांत वर्तमान में दो फिल्मों में काम कर रहे हैं जिसमे एक हरयाणवी फिल्म बॉक्सर भी शामिल है. बिहारी बैकग्राउंड पर बन रही इस फिल्म में चौहान को एक ख़ास किरदार के लिए चुना गया है. इस फिल्म में वो सेकंड लीड रोल में कॉमेडी करते हुए नजर आयेंगे उनका चयन कास्टिंग डायरेक्टर ने ऑडियो विजुअल टेस्ट के बाद किया. इसके अलावे जंगल अन एडवेंचर ट्रीप अपकमिंग फिल्म है.



इस फिल्म से मिली पहचान

विक्रांत को शार्ट फिल्म गोपी से पहचान मिली इस फिल्म को न सिर्फ तारीफ़ और प्रशंसा मिली. बल्कि इसका चयन इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी किया गया. कई जगह यह फिल्म समानित भी हो चुकी है. गोपी में अपने चरित्र को निभाते हुए अटखेलिया और अपने बुधुपन से लोगों को सीख और स्वच्छता का पाठ पढ़ा जाते हैं.



अब तक का सफ़र

विक्रांत चौहान ने कई सीरियल में काम किया है. बिग मैजिक, महुआ, डीडी बिहार, डीडी किसान के लिए काम कर चुके हैं. इसमें लाइफ ओके की सावधान इंडिया पर बिहार में शराबबंदी के पृष्ठभूमि पर बनी इलीगल लिकर विजनेस, बलचनमा(डीडी बिहार) अपराधी कौन (महुआ टीवी), पुलिस फाइल (बिग मैजिक गंगा), स्वस्थ भारत,सरोकार (दुरदर्शन बिहार) इसके अलावे ऐड फिल्मों में जी लीप सीरीज की चार एड फ़िल्में ग्रामीण फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के लिए और बिजली चोरी(बिहार विधुत विभाग) में काम कर चुके हैं. चौहान ने इसके अलावे जिन शॉर्ट फिल्मों में काम किया है उसमे नाइन, मेक मी ए बॉय अगेन, विचक्राफ्ट, झुकी हुई पीठ(2017), वांडेरेर, कायर(2014), व्हाई?(2013) द मेमरेबल मोमेंट (2012), गोपी (2013), झुग्गी (2014), पेंडुलम (2015) विचक्राफ्ट जबकि टेलीफिल्मों में मृगतृष्णा (डीडी बिहार), सचेत-सक्षम(एम्स पटना), जीवन मृत्यु प्रमाण पत्र(यूनिसेफ, पटना), आगनबाडी सामाजिक अकेंक्षण (निदान पटना).



सम्मान: विक्रांत चौहान को अब तक दो सम्मान से नवाजा जा चुका है जिसमे बिहार कला श्री थियेटर में योगदान के लिए 2014 में जबकि दुसरा सम्मान 2017 में पाटलिपुत्रा सम्मान फिल्म और थियेटर में योगदान के लिए दिया जा चुका है.



सीएम से मिली तारीफ

सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 13 अगस्त को उर्जा विभाग के साढ़े चौदह करोड़ सौ करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन, एवं लोकार्पण करने पहुंचे समारोह में बिजली चोरी बनी विज्ञापन में विक्रांत चौहान द्वारा निभाया गया किरदार की अभिनय को देख प्रसन्न हुए और तारीफ़ भी की.



विक्रांत चौहान आज भी अपनी मां को मिस करते हुए भावुक हो जाते हैं और कहते हैं, मै आज भी अपनी मां (स्वर्गीय मनोरमा सिंह) की कही बात को याद करता हूं. वो कहा करती थीं कि, “आगे बढ़ने के लिए सीधी चढ़ना पड़ता है मै चाहे जहाँ रहूं कदम बढाता रहूँगा” आज भी मां बहुत याद आती हैं माँ के हाथों का खाना और प्यार मिस करता हूं.


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