केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा माँग नीतीश ने किया बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और भी शर्मसार

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ब्लॉग. ऋषिकेश शर्मा : पटना विश्वविद्यालय शताब्दी समारोह में मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने प्रधानमंत्री के सामने हाथ जोड़कर पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की माँग की थी. जिसके प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री ने बातों को घुमाते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं दिया. इसके बाद से पटना विश्वविद्यालय के छात्रों में काफ़ी आक्रोश है. लेकिन यह आक्रोश दो अलग-अलग बातों को लेकर है. कुछ छात्रों का कहना है कि हाथ जोड़कर विनती के बाद भी प्रधानमंत्री ने क्यों नहीं दिया.

वहीं कुछ छात्र ये कह रहे हैं कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा माँगना पूरी तरह से आधारहीन था. ऐसा करके मुख्यमंत्री ने पूरे विश्वविद्यालय को शर्मसार किया है. विश्वविद्यालय के ही एक शिक्षक के अनुसार पटना विश्वविद्यालय को नैक की ग्रेडिंग तक नहीं मिली है तो फ़िर किस आधार नीतीश ने यह माँग रख दी.

पटना विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कुल सीट 900 है जिसमें से 250 अभी कार्यरत हैं. पटना विश्वविद्यालय में सालों से शिक्षकों की बहाली नहीं हुई है. प्रोफ़ेसर जैसे जैसे रिटायर हो रहे हैं वैसे ही विभाग का वजूद खत्म होता जा रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार पटना विश्वविद्यालय के कुछ विभाग तो अब शिक्षकविहीन हो गये हैं.

उच्च शिक्षा में शिक्षकों की बहाली 2003 के बाद से नहीं हुई है. बीपीएससी द्वारा 2014 में हुई लेकिन अभी आधे विषय के भी शिक्षक भी नहीं भरे जा सके हैं. इससे विश्वविद्यालय में छात्र एडमिशन नहीं लेना चाहते.

पटना विश्वविद्यालय के हर कॉलेज में हर पिछले वर्ष की तुलना में ज़्यादा सीटें बच जा रही है. छात्रों का पलायन लगातार जारी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मांगने से पहले उन्हें सोचना चाहिये कि आज तक उन्होंने यह मानक क्यों नहीं पूरा किया. क्यों उन्हें इसके लिये भीख माँगना पड़ रहा है.

पटना विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. विश्वविद्यालय के कई विभाग में शौचालय से लेकर पीने तक का पानी का अभाव है. विमेन सेफ्टी भी यहाँ एक बड़ा मुद्दा है जिसपर लोग बात नहीं करना चाहते. पटना विश्वविद्यालय का अतीत बेशक बहुत बेहतर रहा हो लेकिन वर्तमान में यह केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने के मानक के आस पास भी नहीं भटकता. अबतक की जो हालत है उसके लिये केंद्र जिम्मेदार नहीं है. यूजीसी से फंड आती है और बिना खर्च हुए लौट जाती है.

जब नीतीश जी का इससे इतना ही लगाव है तो क्यों नहीं उसे उस स्तर का बना पाये कि केंद्र खुद इसे वो दर्जा दे दे. कई लोगों का ये भी कहना था कि पटना विश्वविद्यालय को ये दर्जा देने के नाम पर हर बार वोट लिया जायेगा जबकि होगा कुछ भी नहीं. केंद्र और राज्य में बैठे यहाँ के पढ़े हुए मंत्रियों को ये सोचना चाहिये कि सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा केन्द्र के साथ राजनीति अशोभनीय है. हालांकि अब नीतीश जी को प्रधानमंत्री की ये चुनौती स्वीकार करनी चाहिये कि जिसे उन्होंने केंद्र का दर्जा नहीं दिया वह शीर्ष दस में अपनी जगह बनाने की क्षमता रखता है.


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