पीएम के आने के पहले ही शिक्षा मंत्री ने कर दिया बड़ा ऐलान…

krishnandan prasad verma

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पटना यूनिवर्सिटी आज अपना शताब्दी समारोह मना रहा है तो अब इसे फिर से पुर्नोधर करने की भी मांग उठी है. हमारे शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा भी यही के छात्र रहे है और इस मौके पर उन्होंने वादा किया है कि उनके दिल में पटना विश्वविद्यालय के लिए खास जगह है और वे इसे फिर एशिया का ऑक्सफोर्ड बनाएंगे.

उन्होंने बताया कि उन्हें इस यूनिवर्सिटी का छात्र होने पर गर्व है. उस जमाने में हम शान से कहते थे कि पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी टेम्स नदी के किनारे स्थित है. ठीक उसी तरह पटना यूनिवर्सिटी की स्थापना भी गंगा किनारे की गई है. कभी पढ़ाई भी उसी तर्ज पर होती थी। दूर-दूर से छात्र यहां पढऩे आते थे. शिक्षा मंत्री ने कहा कि तब पटना यूूनिवर्सिटी में पढऩा हर छात्र के वश की बात नहीं थी. अनुशासन और बेहतर शिक्षा इसकी पहचान थी. शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना थी और शिक्षक भी बच्चों को प्यार-दुलार से और डांटकर पढ़ाते थे. रोज हाजिरी लगती थी और अनुपस्थित होने पर कारण पूछा जाता था.

कॉलेजों में एक्स्ट्रा ट्यूटोरियल व एक्टिविटी क्लासेज होते थे. ग्र्रुप डिसक्शन होता था. हम सब मिलकर किसी खास विषय पर चर्चा करते थे. विचारों का आदान-प्रदान होता था. मंत्री ने कहा कि उस वक्त छात्रों की सोच सकारात्मक थी. सीनियर के प्रति आदर तो जूनियर के प्रति प्रेम भाव था. तब यूनिवर्सिटी में हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग मेस थे। लेकिन, सभी दोस्त थे. मेरे मुसलमान दोस्त भी बने. एक दिन मैं अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ उनके मेस में खाने गया. उनका खाना इतना अच्छा लगा कि मैं उन्हीं के मेस में खाने लगा.

मंत्री ने बताया कि उस वक्त भी अपनी बातों को कहने के लिए आंदोलन होते थे, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से. ङ्क्षहसा और मारपीट का सहारा नहीं लिया जाता था। बातें सुनी जाती थीं. यह यूनिवर्सिटी तो सबसे बड़े छात्र आंदोलन का गवाह रही है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे लिए गïर्व की बात है कि प्रधानमंत्री इस यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में शिरकत करने आ रहे हैं. उनसे यहां के छात्रों और हम सबकी अपेक्षा है कि इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दें। अभी राज्य में शिक्षा का माहौल बदल रहा है.

हमारे पास संसाधनों की कमी है, ऐसे में अगर केंद्र सरकार से सहायता मिल जाए तो राज्य के इस शिक्षा के मंदिर के रूप में सौ साल से जड़ की तरह खड़े इस विश्वविद्यालय की खोई रौनक वापस आएगी. बिहार एक पिछड़ा राज्य है, लेकिन यहां के छात्रों ने हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. यहां भी अगर मूलभूत सुविधाएं मिलने लगें तो जो छात्र बाहर की यूनिवर्सिटीज को प्राथमिकता देते हैं वे पटना यूनिवर्सिटी में पढऩा अपनी शान समझेंगे. उन्हे कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. अगर हमसब मिलकर प्रयास करेंगे और पर्याप्त सहायता राशि मिले तो वादा रहा… फिर से पटना यूनिवर्सिटी को एशिया का ऑक्सफोर्ड बनाएंंगे.


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