विश्व स्तर पर फ़िर से बजा मोदी का डंका, चाहे तो पूरा विश्व सीख सकता है

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फाइल फोटो

ऋषिकेश शर्मा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद से स्वछता और डिजिटल क्रांति पर ज़्यादा जोर दिया. स्वछता के मायने तो कई हैं लेकिन डिजिटल को लेकर सरकार संदेह के घेरे में रही थी. नोटबंदी के बाद यह लोगों की मजबूरी भी बनकर उभरी जब लोगों के पास कैश की कमी हो गई. लेकिन सरकार के लिये एक बड़ी खुशखबरी है. आर्थिक नीतियों के तुरंत बाद आईएमएफ की तरफ़ से आये बयान में यह कहा गया कि भारत डिजिटल परिवर्तन के एक रोमांचक दौर से होकर गुज़र रहा है. इससे विश्व के हर देश को कुछ न कुछ सीखने की ज़रूरत है.

आईएमएफ ने अपनी एक नई किताब में भारत को केस स्टडी के रूप में शामिल किया है. दरअसल भारत में नोटबंदी होने के बाद से सार्वजनिक वित्तीय लेन देन में डिजिटल भुगतान की प्रचलन बढ़ी थी और अब समय आ रहा है कि लोग उसे ही प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं. आईएमएफ की वित्त विभाग की पुस्तक का शीर्षक है, “डिजिटल रेवोल्यूशन इन पब्लिक फाइनेंस”.

इस किताब में भारत की केस स्टडी में कहा गया है कि भारत सार्वजनिक वित्तीय क्षेत्र में किस तरह से डिजिटल प्रौद्योगिकी को प्रमुखता से ले रही है और उसमें और भी कई डिजिटल तकनीकों की भी बातें थी. इसमें वित्तीय समावेशन और बायोमैट्रिक्स का भी ज़िक्र है. भारत के ग्रामीण इलाकों में भी जिस तरह से यह क्रांति गति पकड़ी हुई है, उसे देखते हुए आईएमएफ ने कहा कि भारत की इस डिजिटल क्रांति से पूरा विश्व सीख सकता है.

उन्होंने भारत में संघ और राज्य दोनों स्तर पर वित्तीय संस्थानों के मजबूत होने पर जोर दिया. जीएसटी का उल्लेख करते हुए यह कहा कि वृहत आर्थिक दृष्टि से देखा जाये तो यह भारत के पक्ष में जायेगा. इससे भारत में बाजार बनेगा और आने वाले समय में रोजगार के कई अवसर प्रदान होंगे.

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