मिलिए एक ऐसे बिहारी गुरू से जो अपना जीवन आर्थिक रूप से गरीबों को कर रहा समर्पित

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न्यूज़ डेस्क: एक छोटी सी कोशिश भी दुनिया को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल है. और हम सब मिलकर छोटी कोशिश कर सकते है. आज की कहानी है बिहार के चर्चित मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव की जो आज बहुत सारे आर्थिक रूप से गरीब बच्चों को आइआइटी , एनआइटी , एनडीए मे अपने अभियान आर्थिक रूप से गरीबों की नहीं रूकेगी पढ़ाई के तहत सफलता दिलवाया। आज ये सफल बच्चे अपने गरीबी को काफी पीछे छोड़ अन्य बच्चो के लिए मिशाल है.

शिक्षा के अलावा भी मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव अपने द्वारा निरंतर किये जा रहे कार्यों के लिए मिशाल है. आपको बताते चले की बिहार के चर्चित मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव आर्थिक रूप से गरीब परिवार के लिए भी हमेशा आगे आकर खड़े रहते है. जो अपने आप मे मिसाल है. आपको बताते चले की आर के श्रीवास्तव निःशुल्क शिक्षा के अलावा गरीब बच्चो को काॅपी किताबे आदि अपने माँ के हाथो निःशुल्क बटवाते है। इसके अलावा भी श्रीवास्तव जरूरतमंद के मदद मे हमेशा आगे रहते है। जैसे जाड़े के दिनों मे उन गरीब परिवार के लिए आधी रात को फरिश्ता बनकर खुद पहुँच जाते जो ठंड से काॅपते रहते। वैसे लोगो को स्वयं उनके पास पहुँचकर उनके शरीर पर कम्बल ओढाते। प्रत्येक वर्ष मैथेमेटिक्स गुरू आर्थिक रूप से गरीबों को ठंड के दिनों मे कम्बल वितरण करते और उन परिवारों का आशीर्वाद बिहार के चर्चित मैथेमेटिक्स गुरू को प्राप्त होता। ऐसे बहुत सारे योगदान समाज के अंतिम पायदान के लोगों को श्रीवास्तव के द्वारा दिया जाता.

मैथेमेटिक्स गुरू की सोच हमेशा से यही रहा की पढेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया। खासकर समाज के अंतिम पायदान पर के लोगों को बेहतर शिक्षा दे देश सह राज्य को आग्रीण पंक्ति मे लाना. श्रीवास्तव के सामाजिक तथा शैक्षणिक योगदान के तहत आज सब्जी और पान बिक्रेता तक के बेटे इंजीनियर बनकर अपने देश , राज्य तथा परिवार का नाम रौशन कर रहे।आज ऐसे बच्चे अपने गरीबी को काफी पीछे छोड़ बड़ी कम्पनीयो मे अच्छे तनख्वा पर नौकरी कर रहे. मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के द्वारा विगत 10 वर्षों से चलया जा रहा अभियान आर्थिक रूप से गरीबो की नहीं रूकेगी पढ़ाई की चर्चा अब बिहार राज्य सहित पूरे देश मे हो रहा. आपको बताते चले की इस अभियान के तहत आर्थिक रूप से गरीब छात्र – छात्राओ को निःशुल्क शिक्षा के अलावा पाठ्रय साम्रगी भी उपलब्ध कराया जाता है। जिसके लाभ के तहत बहुत सारे गरीब बच्चे आज अच्छे ओहदे पर पहुँच कर अपने गाँव अपने परिवार का नाम रौशन कर रहे है. जिसमे मोथा निवासी सब्जी बिक्रेता संजय गुप्ता का पुत्र श्रीराम , दावत डिहरा के किसान पुत्र मुकेश , पान बिक्रेता के पुत्र सचिन सहित दर्जनो बच्चे आइआइटी , एनआइटी , वीसीइसीई जैसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग काॅलेजो मे दाखिला ले अपना परचम लहरा चुके है.

मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के द्वारा चलाया जा रहा अभियान आर्थिक रूप से गरीबो की नही रूकेगी पढ़ाई को देश सह राज्य के वरिष्ठ शिक्षित लोगो ने खूब सराहा। तथा बेहतर राज्य सह राष्ट निर्माण मे योगदान के तहत आर के श्रीवास्तव को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दिया. सभी शिक्षक ऐसा सोचे और करे तो भारत को विश्व गुरू बनने से कोई रोक नही सकता क्योकि पढेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया. गणितज्ञ आर के श्रीवास्तव ने बताया की आधी से भी अधिक जनसंख्या आर्थिक रूप से गरीब है वैसे अभिभावक अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा नही दे पाते क्योकि प्राइवेट स्कूल के मनमानी फीस देने मे वे सक्षम वे नही है. अतः वैसे बच्चो को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने और बेहतर शिक्षा देने के लिए सरकारी स्कूलो की स्थिति सुधारना होगा।और यह तभी संभव है जब सरकारी आॅफीसर , मंत्री आदि अपने बच्चो को सरकारी स्कूल मे ही नामांकन करवाये।यदि ऐसा जिस दिन से शुरू हो गया उसी दिन से सरकारी विधालयो मे प्राइवेट स्कूलो से भी बेहतर शिक्षा मिलने लगेगा। जिसके लाभ के तहत गरीब से गरीब बच्चे अच्छे शिक्षा ग्रहण कर बेहतर नागरीक बनेगा. जिससे तहत हमारा देश नई बुलंदियो को छू लेगा.


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