कहने को तो गांव में दो अस्पताल, पर डॉक्टर के जगह बैठते हैं जानवर


मुकेश कुमार की खास रिपोर्ट : मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड के फुलौत पंचायत के दो उप स्वास्थ्य केन्द्र लोगो के लिए कारोबार का स्थल बना हुआ है. इसका जीता जागता उदहारण कभी भी देखने को मिल सकता है. बता दें की फुलौत में सरकार के द्वारा दो स्वास्थ केंद्र बनाए गए हैं लेकिन ईलाज भगवान भरोसे ही यहां हो सकता है. क्युकी अस्पताल के नाम पर केवल भवन का निर्माण किया गया है.

फुलौत पूर्वी पंचायत के उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीज के ईलाज के बदले शौचालय के रिंग व पिलर का निर्माण किया जा रहा है. वहीं फुलौत पश्चिमी पंचायत के उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीज के ईलाज के बदले मवेशी का पालन किया जाता है. हलांकि सरकार ने लोगों के सुविधा के लिए हर पंचायत मे उप स्वास्थ्य केन्द्र खोल दिया है, लेकिन इन प्राथमिक स्वास्थ केंद में न तो मरीज दीखते हैं और न ही डॉक्टर.

यह सब देखते हुए एक ही शब्द निकल रहें है कि यदि यहां की स्थानीय समिति, मुखिया, सरपंच, व प्रखंड प्रशासन उप स्वास्थ्य केन्द्र के प्रति जागरूक होते तो आज इसकी यह हालत नही होती. सिर्फ यही स्वास्थ केंद्र नही वल्कि कई अन्य उप स्वास्थ्य केन्द्र मोरसंडा, चीरोरी, फुलौत पूर्वी , फुलौत पश्चिमी, कलासन, लौआलगान, अरजपुर के उप स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ कागजी ईलाज चल रहे है. नहीं तो डॉक्टर और ना ही एएनएम को यहां पदस्थापित किया गया है.

स्थानीय ग्रामीण कलाधर मंडल, अरविंद कुमार मंडल, शुभाष कुमार और मंटू मंडल समेत सभी अन्य लोगों का कहना है की उप स्वास्थ्य केन्द्र मे मरीज के ईलाज के बदले शौचालय का सामग्री व मवेशी का पालन किया जाता है. इसके साथ ही इस गाँव में पानी, बिजली, जाने के लिए रास्ता भी नही है.
चिकित्सक प्रभारी चौसा अमित कुमार सिंह ने बताया कि फुलौत के दोनो पंचायत के उप स्वास्थ्य केन्द्र के आस पास के ग्रामीण ने दबंगई से कब्जा जमा रखे हैं. सप्ताह के भीतर ही वहां पहुंच अतिक्रमण को हटाया जाएगा.


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