तेजप्रताप यादव ही होंगे लालू के अगले राजनीतिक वारिस?

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tej pratap yadav lalu


ब्लॉग. लालू प्रसाद के बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव धीरे-धीरे राजनीति में सब विरोधियों पर भारी पड़ते जा रहे हैं, जब से यूपी में मुलायम और अखिलेश यादव का विवाद सुर्ख़ियों में था तभी बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इस बात को लेकर हवा दे दिया की लालू अपने बेटे को राजनीति में ले आये लेकिन उन्हें कुछ सिखाएं नहीं तो वो सिर्फ बासुरी ही बजाते रह जायेंगे. दरअसल उनका सीधा हमला तेजप्रताप पर था लेकिन मोदी ने यह कह कर तेजप्रताप को हमला करने का मौका दे दिया उन्ही के अंदाज में सोशल मीडिया के जरिए माकूल जबाब दे दिया.

अगर लालू के विरासत को आगे बढ़ाने की बात की जाय तो दोनों भाई में अलग-अलग खूबियाँ है छोटे भाई तेजस्वी यादव शुरुआत से ही राजनीति को भांप चुके हैं और मीडिया में अक्सर अपना बयान देते रहते है त्वरित कार्रवाई भी सोशल मीडिया से माध्यम से करने का काम करते हैं लोगों का मानना है की वह पूरी तरह राजनीति करने में माहिर तो हो गए हैं परन्तु लालू यादव वाला अंदाज नहीं है जिस अंदाज के लिए लालू यादव के समर्थक हमेशा उनको जानते हैं. तेजस्वी एक सधे हुए प्रवक्ता की तरह बयानबाजी करते हैं उनमें चतुराई चपलता बुद्धिमता भी है और अंदाज अपनी बड़ी बहन मीसा भारती से मिलता-जुलता है कभी कभी देख लगता है की वो शुद्ध राजनितिक प्रवक्ता हैं.

दूसरी तरफ अगर तेजप्रताप की बात करें तो उनका बात करने का अंदाज हाव –भाव, आक्रमकता, विरोधियों पर सीधा वार करने का कला अपने पिता लालू यादव से मेल खाता है. लेकिन उनमे अपने पिता और छोटे भाई तेजस्वी से भिन्नता यह हो जाती है वह मीडिया में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं और ज्यादातर मीडिया के चमक-दमक भरे कैमरे के लाइम-लाइट से दुरी बनके रखते हैं लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इस बात का अंदाजा हो रहा है कि अगर राजनीति में अपना वर्चस्व कायम रखना है तो दो ही तरीके है जिससे खुद को स्थापित किय जा सकता है पहला सांगठनिक स्तर पर और मीडिया में दुसरा खुद मीडिया में बनाये रखना नहीं तो अंधेरे में रह कर ज्यादा दिन इस समय के राजनीति में खुद को नहीं स्थापित रखा जा सकता है. इस के लिए दोनों स्तर पर उन्होंने काम करने का काम किया है.

तेजप्रताप अब बिहार के राजनीति को समझने लगे हैं तभी तो उन्होंने अपनी जड़ें को मजबूत रखने के लिए फैसले लेने शुरू कर दिया है. नवनियुक्त छात्रसंघ के प्रदेश अध्यक्ष को संरक्षक होने के नाते पूरी कमिटी को भंग करने का सलाह दे दिया जिसपर इसका पालन हुआ उन्हें इस बात का अनुभव हो गया है की अगर राजनीति में खुद को स्थापित रखना है तो युवा कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज होनी चाहिए जिसका सबसे बड़ा जरिया छात्र राजनीति ही होता है इस कारण वह इस पर अच्छा-खासा ध्यान दे रहे हैं तेजस्वी के मुकाबले तेजप्रताप मीडिया से कम बातचीत करते हैं लेकिन अब अपने आप को सोशल मीडिया पर सक्रिय रखने लगे हैं तथा कुछ बयान उनके मीडिया में भी आना शुरू हो गया है.

उन्होंने प्रकाश उत्सव पर पीएम मोदी द्वारा उनके बासुरी बजाने से पर उन्हें किशन कन्हैया बताये जाने पर सधा हुआ और माकूल जबाब दिया और कहा की हम यदुवंशी है और बासुरी बजाने का कला हमारे रगों में बसता है अगर पीएम हमको किशन कन्हैया कह देते हैं तो इसमें राजनीति वाली कोई बात नही है. राजनीति दृष्टीकोण से देखा जाय तो तेजप्रताप धीरे-धीरे लम्बे रेस के घोड़े बनते दिख रहे हैं. लेकिन उनके साथ जो वृन्दावन से लौटने के क्रम में पटना एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों ने उत्पात मचाया था जिस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की चेतावनी तक दे डाली थी अगर यहीं सिलसिला जारी रहा तो यह निश्चित है की उनका कद पार्टी में तेजस्वी से अलग और जल्द ही बड़ा भी हो जाएगा.
विकर्ण राज, (एडिटर डेली बिहार न्यूज़)



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