मेरे इन सवालों को पढ़ हिल जायेगी नीतिश सरकार…

NITISH KUMAR

फ़ाइल फोटो


ब्लॉग. महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपने जनता से किया हुआ सात निश्चय में से एक पुरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू कर दिया है लेकिन जिस तरह से लगातार बिहार के विभिन दुरदराज इलाकों में अवैध शराब कि बड़ी-बड़ी खेप पकड़ी जा रही है उससे सरकार के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगना शुरू हो गया है. क्या बिहार में भी गुजरात की तरह शराब का कानून बन कर रह जायेगा या फिर अपने वास्तविक मुकाम को हासिल करेगा. यह प्रश्न चिन्ह इस लिए लग रहा है क्योंकि यह शराब का खेप दुसरे दूर राज्यों से इहार में लाया जा रहा है और राज्य कि राजधानी तक यह पहुँच जा रहा है जिसके कारण बिहार सरकार कि पुलिस प्रशासन और खुफिया विभाग कि विफलता को दर्शाता है.

राज्य सरकार ने बिहार उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2016 पारित किया है, जिसमें दण्ड के काफी कठोर प्रावधान है और उत्पाद अधिनियम के अंतर्गत अपराध संधानित और जमानती नही होंगे. उत्पाद अधिनियम के उल्लंघन के लिये न्यूनतम दण्ड 5 वर्ष और एक लाख रूपया जुर्माना और अधिकतम दण्ड 10 लाख रूपया जुर्माना के साथ आजीवन कारावास है. सभी प्रकार के शराब की बिक्री धारिता और उपभोग प्रतिबंधित हैं बिहार उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2016 बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों से पारित है और महामहिम राज्यपाल का अनुमोदन प्राप्त है.

मेरा कुछ सीधा और आसान सा सवाल बिहार सरकार से है..
पहला सवाल यह है कि बिहार में विदेशी शराब दूर दुसरे राज्यों से आ रहा है जैसे झारखण्ड हरियाणा इसमें प्रमुख है. यह हर किसी को मालुम है कि दुसरे राज्य से आने वाले हर वाहन को राज्य सरकार के पुलिस और अधिकारी राज्य में प्रवेश करने से पहले टोल नाके पर चेक करते है तो फिर बड़े-बड़े ट्रकों में भर कर शराब आखिर राज्य के राजधानी तक कैसे पहुँच रही है. क्या पुलिस और खुफिया विभाग इसमें नाकाम साबित हो रही है. सरकार ने विधानसभा में मध् पान निषेध कानून 2016 को सर्वसम्मति से पारित करवाकर इसे कानून का रूप दे दिया लेकिन इसे कानून के रखवाले ही शायद कारगर पालन करवाने में रूचि ले रहे हैं. इस कानून में कुछ ऐसी बाते है जिस्सको लेकर पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिए थे किसी भी थाना के अंतर्गत अगर अवैध शराब पकड़ा जाता है तो सारी जिम्मेवारी इस एरिया के थानेदार के ऊपर आएगी.

सरकार ने शराबबंदी को लेकर एक मुहीम चला रखी है सीएम हर सभा में यह कहते है कि हम शराबबंदी को पुरे सुनियोजित तरीके लागू किये है लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर यह उसी ढंग से लागू होता तो फिर इतनी बड़ी चुक कैसी हो सकती है. गौर करने वाली बात है कि हर राज्य से आने वाले वाहनों को एक-एक कर जांच किया जाता है तो फिर ये कैसे संभव है कि ट्रक के ट्रक शराब का कार्टन यहां बिहार में पहुँच रहा है. शराब माफिया ने तो पुलिस को चकमा देने के लिए एक नया तरीका ढूढ़ निकाला कैश वैन का उपयोग कर शराब कि ढुलाई पीएनबी के कैश वैन को दरभंगा में पुलिस ने पकड़ा था जिसे देख यह तो जरुर पक्का हो जाता है कि पुलिस लापरवाह है क्युकि जिस वाहन का उपयोग किया जा रहा था वह हरियाणा कि थी तो क्या पुलिस को इस बात का भनक नहीं लगा कि हरियाणा से कैश वैन से पैसा मंगाया जा रहा है वो भी इतने दूर से जोखिम के साथ क्योंकि लगभग हर राज्य में भारतीय रिजर्व बैक का क्षेत्रीय कार्यालय होता है जिससे पुरे राज्य में बैंको कैश दिया जाता है.

अब तक ना जाने कितने करोड़ के अवैध शराब बिहार में पकड़ा जा चूका है पर उसमे कितनी कठोर कार्यवाई हो रही है यह भी संदेह के घेरे में है क्युकि विपक्ष लगातार सरकार के ऊपर इस बात को लेकर सवाल खड़े किये हैं हम के सुप्रीमों और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन रा मांझी ने भी इस बात को लेकर कहा था कि दलगत भावना से ऊपर उठ कर इसपर कार्यवाई किया जाना चाहिए अवैध शराब के मामले में नालंदा में जदयू के नेता चंद्रसेन के यहां शराब कि बोतलें पकड़ी गयी लेकिन इस मामले में कार्यवाई करने वाले उतपाद अधिकारी को ही सजा भुगतना पड़ा. जाहिर सा बात है मामला सीएम के गृह जिले का यह हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण खुद एसपी आशीष कुमार ने अपने स्टार से जांच किया और नेता जी को क्लीन चीट दे दिया उसी कानुन के जरिए जिसे लोग तालिबानी कानून का संज्ञा दे रहे है जिसमे इस कानून का लाभ उठा कर किसी निर्दोष को फंसाया जा सकता है.

अब सवाल यह उठता है कि शराब के कारोबार से हर पार्टी के लोगों का नाता रहा है तो कार्यवाई में पक्षपात भी तो नहीं होना चाहिए और अगर अभी भी कोई इस कानून के लागू होने के बाद भी अवैध रूप से शामिल है तो क्या उसके साथ भी वहीं बर्ताव होगा शायद यह सवाल बिहार कि हर जनता सरकार से करना चाहती है एक ऐसा ही हाई प्रोफाइल मामला मुजफ्फरपुर में जदयू के एमएलसी का बेटा ही अवैध शराब कारोबार में संलिप्त है जिसकी शिकायत पुलिस से किया गया है आरोप दर्ज करने वाली है एक महिला जिसका पति छोटू सिंह को इस कारोबार में साथ देता था.

अगर बिहार सरकार पूर्ण शराबबंदी को कारगर ढंग से इस पर अमल करना होगा और इसके क्रियान्वयन को लेकर सजगता से काम करना पड़ेगा सबसे पहले पड़ोसी राज्यों से सटे जिला के पुलिसकर्मियों को इस बात को लेकर सजग कर देना पड़ेगा कि हर हाल में अवैध शराब को राज्य के अन्दर नहीं आने देना है इसके लिए राज्य के सीमा पर सघन जांच के अलावे दुसरे राज्य से आने वाले हर एक वाहन पर कड़ी नजर रखा जाय उन सारे दुसरे रास्ते पर नजर रखी जाय जिसका इस्तेमाल शराब माफिया कर सकते हैं. इसके अलावे उन सारे शराबकारोबारियों को बुलाकर सरकार यह शपथपत्र दायर करवाए कि अगर वो इस धंधे में रंगे हाथों पकड़े जाते है है तो उनकी सम्पत्ति पर सरकार कब्जा कर लेगी चाहे वो राजनीति के किसी भी गलियारे से ही ताल्लुक वो क्यों न रखता हो. समय-समय पर सरकार इसकी समीक्षा करे.

राज्य के दूर दराज गांव में भी अवैध रूप से देशी शराब का धंधा तेजी से फैला है जिसमे वही कारोबारी इसे तैयार कर मंहगे दामों पर बेच रहे है इसको को लेकर कठोर कदम उठाने कि आवश्यकता है. साथ ही जो लोग शराब कारोबार में पहले से लगे हुए थे उन्हें सरकार अपने रडार पर रखे साथ ही समय समय पर उनकी सम्पत्ति का ऑडिट कराया जाय सरकार यह प्रावधान करे कि शराब कारोबारी इसमें तस्करी में अगर पकड़े जाते हैं तो उन्हें किसी भी सरकारी लाभ से हमेशा के लिए वंचित किया जा सकता है अगर कोई राजनीतिक गलियारों से संबंध रखता है तो उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाय. अगर हमें इस शराब तस्करी को रोकना है तो इसके जड़ो पर वार करना है अन्यथा सिर्फ राजनीति का विषय बन के रह जाएगा.
ब्लॉग. डेली बिहार न्यूज़ एडिटर, विकर्ण राज..


[related_posts_by_tax title=”रिलेटेड न्यूज़:” posts_per_page=”3″]
इस न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.
[addtoany]

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *