छात्रवृति नहीं मिलने पर बिहार के महादलित छात्र को परीक्षा देने से रोका, भविष्य अधर में!

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अजित कुमार: माँ-बाप का एक सपना होता है की वह अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा दे ताकि उसका भविष्य सुनहरा हो लेकिन जब गरीबी में पैदा हुआ छात्र किसी तरह इस सपने को पूरी करने निकल पड़ता है तो उसे ढेर साड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है कुछ ऐसा ही हाल एक बिहार के छात्र का है जो अपने गाँव और परिवार में पहला इंजीनियर बनने वाला था लेकिन अब उसका सुनहरा भविष्य अधर में लटक गया है.

बिहार के पूसा समस्तीपुर का एक महादलित छात्र रंजीत कुमार राम ने 2014 में मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित मालवा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड मैनेगेजमेंट मैकेनिकल ब्रांच में अपना दाखिला पटना स्थित सनमत ट्रस्ट के माध्यम से करवाया था उस समय यह कहा गया था की आपको कोई खर्च नहीं लगेगा सिर्फ नामांकन का खर्च दिया गया था बाकी सारी सुविधाएं कॉलेज के तरफ से उपलब्ध करवया जा रहा था लेकिन अब परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया है. परीक्षा इसी महीने के 6 जनवरी से शुरू हो रहा है जिससे वह वंचित रह जाएगा.

बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय से मिलने वाला छात्रवृति उसे नहीं मिला जिसके कारण उसको तीसरे साल का एग्जाम नहीं देने दिया जा रहा है इस वजह से उसका भविष्य अधर में लटक गया है. यह छात्र अपने क्लास में टॉप रहा है उसका cgpa 8.6 रहा है दूसरे साल तक. लेकिन पैसा के अभाव में उसको तीसरे साल के एग्जाम में नहीं बैठने दिया जा रहा है कॉलेज प्रशासन 1 लाख रूपए कि मांग कर रहा है उसके पिता श्रीचन्द्र राम गाँव में मजदूरी का काम करते है उसका पहले साल का छात्रवृति अभी तक पेंडिंग में है और 2015 से 2016 का मात्र 26000 रूपए आया था जबकि इस साल का अभी तक नहीं आया है ऐसे में सरकार अगर कोई कदम नहीं उठाती है तो एक महादलित छात्र का भविष्य अधर में चला जायेगा.

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