पत्रकारों के लिए सौरभ कुणाल ने उठाई हैं आवाज अगर सरकार मान ले तो मजबूत हो जायेगा लोकतंत्र

saurabh kaunal


ब्लॉग. सौरभ कुणाल, राजनीति के गलियारे पर भ्रष्टाचार और दबंगई के दौर में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ इस समय बेहद नाजुक दौर से गुजर रहा है. बिहार में पिछले 4 महीने में 3 पत्रकार और झारखण्ड में 2 पत्रकार की हत्या चुकी है. यह बहुत ही चिंताजनक स्तिथि है कि एक पत्रकार अपने देश और समाज के खातिर जान जोखिम में डाल कर अपने कर्त्तव्यों का पालन करते हुये अपना जान तक गंवा देता है, और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है.

कुछ लोगों द्वारा श्रद्धांजली सभा या दो मिनट का मौन रख लेने से बात खत्म नही होती है, क्योंकि ऐसे अपराधों का यह सिलसिला आतंक का कुछ ऐसा माहौल तैयार कर रहा है जिससे प्रेस कि स्वतंत्रता धट रही है और मिडिया कमजोर हो रही है. किसी पत्रकार कि हत्या अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की हत्या है.

पत्रकार किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार और जनता के बीच संवाद की एक महत्वपुर्ण कडी होता है, जो ना सिर्फ लोगों के बीच सरकार और उसके क्रिया-कलापों की जानकारी देता है, बल्कि एक पहरेदार के तौर पर सरकार पर नजर भी रखता है. किसी भी समाज का विकास इस बात पर निर्भर करता है कि वहाँ के पत्रकार कितना स्वतंत्र और सुरक्षित महसुस कर रहे हैं, क्योंकि पत्रकार ही भष्टाचारियों कि पोल खोल कर सरकार कि पारदर्शिता और साख को सुनिश्चित करता है.

प्रेस कांसिल ऑफ इंडिया के एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 25 सालों में 90 पत्रकारों कि हत्या की जा चुकी है, लेकिन ज्यादातर केसों में या तो अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया जा चुका है या वर्षो से लंबित पडी हुई है. प्रेस कांसिल के रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के लगभग 94 प्रतिशत केस अभी विभिन्न कारणों से लंबित पडे हुये हैं. एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 25 सालों में जिन पत्रकारों की हत्या हुई है, उनमें 47 फीसदी राजनीति और 21 फीसदी बिजनेस कवर करते थे. इसके अलावे कुछ ऐसे भी मामले सामने आते हैं जब खबर लिखने के बाद पत्रकारों पर केस दर्ज हुए, हमले हुए, या धमकाया गया. यहां तक कि गोली भी मारी गई है.

पत्रकार सुरक्षा कानून एक मात्र हथियार है जिस से कलम के सिपाहियों की रक्षा हो सकती है, दुनिया के कई देशों में पत्रकार सुरक्षा कानून बने हैं, जो पत्रकारों को सही और सच्ची खबर लाने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन भारत आज भी पत्रकार सुरक्षा कानून से वंचित है। वैसे कुछ कानुन-वेत्ताओं का मानना है कि यह एक ऐसा विषय है जिस पर राज्य सरकार खुद पहल करके कानून बना सकती है. ऐसे में नितिश कुमार अपने छवि के अनुरूप पत्रकारों को सुशासन से परिचित करा पाते हैं कि नहीं ये तो भविष्य ही बतायेगा, क्योकि बिहार में हो रहे पत्रकारों पर हमला कि निंदा ना सिर्फ देश के अंदर हो रही बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई पत्रकार संघ भी निंदा कर रहे हैं.

ऐसे में समाज के कई हिस्सों से पत्रकारो के हित में पत्रकार सुरक्षा कानुन लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. कई तरह के फोरम पर इस विषय पर चर्चायें भी हो रहीं है और पत्रकार संगठन, मिडियाकर्मी, समाजसेवीयों और कानुनवेत्ताओं ने इस विषय पर बडी मुखरता से अपनी बात रखी है. इन चर्चाओं में जो बाते मुख्य तौर पर निकल कर सामने आ रहीं हैं वह निम्नलिखित हैं.

1. सभी पत्रकार या मीडियाकर्मी को न्युज कवरेज के लिये राज्य तथा केन्द्र की ओर से आई-कार्ड जारी किया जाए, तथा न्युज कवरेज के दौरान विषेश अधिकार दिया जाए.

2. प्रशासनिक व विभागीय बैठकों में पत्रकारों की उपस्थिति अनिवार्य हो, एवं किसी भी तरह के विभागीये कागजात जोकि सुचना के अधिकार के तहत उपलब्ध हो पत्रकार को निशुल्क उपलब्ध करायी जाये.

3. यदि पत्रकार या मीडियाकर्मी को धमकियां मिले, या कोई हमला हो तो ऐसे केसों कि सुनवाई विशेष कानुन के तहत स्पेशल कोर्ट में होनी चाहिए एवं उसकी सुनवाई शीघ्र हो तथा उस दौरान उन्हें तथा उनके परिजनों को सुरक्षा प्रदान की जाए.

4. अगर किसी पत्रकार पर कोई केस दर्ज कराता है तो मामले की जांच किसी उच्च अधिकारी से करायी जाये एवं मामले की पुष्टि होने पर ही केस दर्ज किया जाए तथा मामले की सुनवाई स्पेशल कोर्ट के तहत हो. यदि मामला झुठा साबित होता है तो वादी को सख्त कानुन के तहत दण्ड दिया जाये.

5. इसके अलावे अगर किसी पत्रकार या मीडियाकर्मी की कवरेज के दौरान दुर्घटना या मृत्यू होने पर नि:शुल्क बीमा प्रदान किया जाए एवं कवरेज के दौरान घायल हुए पत्रकार या मीडियाकर्मी का इलाज के लिए विशेष स्वास्थ बीमा की व्यवस्था होना चाहिए.
जर्नलिस्ट सौरभ कुणाल, गेस्ट एडिटर…


[related_posts_by_tax title=”रिलेटेड न्यूज़:” posts_per_page=”3″]
इस न्यूज़ को शेयर करे और कमेंट कर अपनी राय दे.
[addtoany]

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *