JNU के लापता छात्र नजीब के सपोर्ट में बिहार में भी उठने लगी आवाज, शमीम ने कहा यह लड़ाई..

jnu student najib


शमीम क़मर रेयाज़ी. जवाहर लाल विश्वविद्यालय से लापता हुये छात्र नजीब अहमद को 100 से भी ज़्यादा दिन बीत गया मगर अब तक कोई सुराग न मिल पाना की वो जिन्दा भी है या नहीं एक संवेदनशील मामला बनता जा रहा है. गौरतलब है कि जेएनयू का छात्र नजीब अहमद बीते 100 दिनों से लापता है और लापता होने से ठीक पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कुछ कार्यकर्ताओं ने उसके साथ मारपीट की थी. नजीब के लापता होने के बाद चल रही अपहरण की थ्योरी को दिल्ली पुलिस द्वारा खारिज किया जाना और अबतक नजीब का न मिल पाना इस पुरे संस्करण में प्रशासन और सरकार की कोताही जगज़ाहिर है.

जब यूनिवर्सिटी प्रशासन और दिल्ली पुलिस के पास इस बात का पुख्ता सबूत है कि नजीब के JNU परिसर से गायब होने से पहले ABVP के कार्यकर्ताओं से झड़प हुयी थी. फिर अचानक से नजीब का लापता होजाना निसन्देह शक की सुई ABVP के कार्यकर्ताओं पे जाती है. तो दिल्ली पोलिस या यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अबतक ABVP के खिलाफ कोई कदम क्यों नही उठाया ? सरकार और प्रशासन किसको बचाने में लगी है.

लापता छात्र नजीब की बेबस और मजबूर माँ फातिमा नफीस अपने बेटे की तलाश में दिल्ली की सड़कों पे दर बदर भटक रही है. ‘मुझे मेरा बेटा लौटा दो. मैं किसी के खिलाफ किसी कार्रवाई की मांग नहीं करूंगी. मुझे सिर्फ वह वापस चाहिए और एक बार वह मुझे मिल गया तो मैं चली जाउंगी ,वह हर आने जाने वाले लोगों से एक ही सवाल पूछती है “मेरा बेटा कहाँ है ” मुझे कोई मेरे बेटे का पता या सुराग बतादो मगर फातिमा को हर दिन मायूसी और निराशा ही किस्मत बनती है. फिर अपने बेटे के इंतज़ार में पल पल मौत के मुह में समाती यह बेबस माँ को कही से भी कोई उम्मीद की किरण दिखाई नहीं देता है यही रोज का मामूल है उसके बाद भी एक माँ को आशा है की उसका बेटा एक दिन अवश्य मिलेगा.

जेएनयू के विद्यार्थी लापता छात्र के परिवार का समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने कुलपति और यूनिवर्सिटी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशासनिक ब्लॉक में बन्दी भी बनाया था। नजीब की माँ की शिकायत है की पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन मेरे बेटे के मामले में असंवेदनशील हैं. हालांकी दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन पहले ही कर चुकी है और देशभर में विभिन्न संबंधित एसएसपी और पुलिस अधिकारियों को भी सूचित कर चुकी है उसके बाद भी नजीब की वापसी पुरे भारतीय प्रशसनिक प्रणाली पे सन्देह का निशान छोड़ जाती है की आखिर अबतक नजीब की कोई खबर या सुराग क्यों नहीं ? क्या नजीब ABVP कार्यकर्ताओं द्वारा अपहृत है ? या वह किसी राजनीति साजिश का शिकार होगया? क्या नजीब की हत्या करदी गई है ? ऐसे कई सारे प्रश्न हैं जिसका उत्तर मिल पाना कठिन ही नहीं नामुमकिन है.

नजीब भी JNU की छात्र संग की राजनीत मे सक्रिय था और शायद वह इसी राजनीति के भेंट चढ़ गया. मगर कुछ धर्मिक और राजनीती के जानकार इस मामले की तार कश्मीरी आतंकी बुरहान वाणी से जोड़ के देख रहे हैं मगर इसका साक्ष्य नहीं है की सच क्या है.

इंसानियत का तकाज़ा है की जातिवाद, रंग नस्ल के भेद भाव से ऊपर उठ कर नजीब की वापसी के लिए नजीब की बे सहारा बूढी मजबूर माँ के ग़मो मे शरीक हुआ जाये और इस आंदोलन को हरा और जारी रखने के लिये आंदोलन को ज़िंदा रखा जाये, सरकार और प्रशासन पे दबाव बनाया जाये, जिस तरह से छात्रों का प्रदर्शन नजीब की वापसी मोहीम में देखने को मिल रही है वह सराहनीय है. चाहे वह सोशल मिडिया पे लेख के माध्यम से हो या दैनिक, टीवी, शार्ट फ़िल्म के माध्यम से ही क्यों न हो.

आज मैं इन बातो को धड़कते दिल और काँपती उंगलियो से अपने ज़ज्बात आप तक पहुँचा रहा हूँ. केवल मेरा मकसद यह है की एक माँ को उसका बेटा मिल जाए और लिप्त मुजरिमो को जेल की सलाखें. नजीब की लड़ाई हर उस माँ की लड़ाई है जिन्हों ने अपने जिगर के टुकड़े को खोया है. याद रखिये यह हादसा कल आपके बेटे, भाई, दोस्त किसी के साथ भी हो सकता है !!


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